Jolha Dakshini, Ward – 23 (Varanasi)
Sanwara(Ballia-Rasra-221721)BallotBoxIndia treats a district's development like a shared fund, and every socio-political innovator — leader, NGO, business, expert, journalist, activist — like a contributor whose impact we try to measure. The scores here are an experiment to tell apart what an innovator actually moved (नेता का हाथ · their real contribution) from what circumstance carried (हालात · the wave).
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वाराणसी का मिश्रित आबादी वाला जोल्हा दक्षिणी वार्ड 23
वाराणसी भेलूपुर जोन स्थित नागवा सबजोन का हिस्सा है. यह वार्ड लगभग 0.407 वर्ग
किलोमीटर के परिक्षेत्र में विस्तृत है, जिसमें आने वाले प्रमुख मोहल्लों में
फारुकी नगर, गिविधिपुर, बाज़ारढिया रोड, आजाद नगर, मुर्गिया टोला इत्यादि सम्मिलित
हैं. बाज़ारढिया रोड क्षेत्र को यहां के प्रमुख व्यवसायिक इलाके के रूप में देखा जाता
है.
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इस वार्ड की आबादी तकरीबन 35,000 है और यहां
पार्षद के तौर पर कांग्रेस पार्टी से रेहाना जी कार्यरत हैं, जो वर्ष 2017 से महिला सीट पर
जोल्हा दक्षिणी वार्ड से पार्षद पद पर कार्यरत हैं और उनके पति पूर्व पार्षद अख्तर अली यहां पार्षद प्रतिनिधि के रूप में स्थानीय विकास कार्यों में संलग्न हैं.
इस वार्ड में जीविका के साधन मिले जुले हैं, यानि यहां
व्यापारी वर्ग, छोटे लघु-कुटीर
उद्योगों से जुड़ी जनता, छोटे व्यापार में
संलग्न लोगों के साथ साथ नौकरीपेशा जनता का भी निवास स्थान है, जिसमें सरकारी
एवं प्राइवेट दोनों ही सेक्टर से जुड़े लोग सम्मिलित हैं.
वाराणसी का सबसे पिछड़ा वार्ड कहे जाने वाला जोल्हा दक्षिणी वार्ड
80 फीसदी तक मलिन
बस्तियों से घिरा हुआ है,
जिसके चलते मौलिक
सुविधाओं का बेहद अभाव है. यहां जन सुविधाओं की दृष्टि से उपयोगी कूड़ा घर, पानी की टंकी, नागरिक स्वास्थ्य
केंद्र, बड़े विद्यालय, पार्क, कम्युनिटी हॉल
इत्यादि का भी अभाव है. यहां शिक्षा सुविधा के रूप में मात्र कुछ मदरसे और काशी
पब्लिक स्कूल की ही सुविधा है, जिसके चलते छात्रों को बेहतर शिक्षा के लिए अन्य
वार्डों का रुख करना पड़ता है.
यदि बात वार्ड की समस्याओं की करें तो पूर्व पार्षद एवं वर्तमान पार्षद प्रतिनिधि अख्तर अली के मुताबिक, उनका वार्ड जिले के 90 वार्डों में से सबसे पिछड़ा वार्ड है. उनके पार्षद बनने से पहले यहां सीवर, नाली, पक्की सड़कें आदि की कोई व्यवस्था नहीं थी. 2012 में पार्षद बनने के बाद उन्होंने इन मुद्दों पर कार्य करवाना शुरू करवाया. किन्तु मौजूदा सरकार के कार्यकाल में छोटे स्तर पर विकास कार्य धीमा हो गया है तथा फंड की कमी के चलते अभी भी वार्ड की 30 प्रतिशत सड़कें कच्ची हैं, जिन पर बजट न मिलने के कारण कार्य नहीं हो पा रहा है.
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