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Prayag ghat Ward-52 (Prayagraj)

Prayag ghat Ward-52 (Prayagraj)

K N Marg(Allahabad-Allahabad-211001)
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प्राचीन समय से ही प्रयागराज को विद्या और ज्ञान का गढ़ कहा जाता रहा है साथ ही देश का राजनीतिक व अध्यात्मिक रूप से सर्वाधिक जागरूक शहर प्रयागराज को माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसी शहर से बड़ी संख्या में देश को प्रधान मंत्री प्रदान किए हैं. इसके अतिरिक्त यदि धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो देवभूमि प्रयागराज हिन्दुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थल है.

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार पृथ्वी की रक्षा करने के लिए सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने यहां पर बहुत बड़ा यज्ञ किया था. जिसमें पुरोहित, भगवान विष्णु ने यजमान की भूमिका निभाई और भगवान शिव उस यज्ञ के देवता बने. साथ ही यज्ञ के अंत में तीनों देवताओं ने अपनी शक्ति पुंज के द्वारा पृथ्वी से  पाप का बोझ हल्का करने के लिए एक 'वृक्ष' को उत्पन्न किया. जो बरगद का वृक्ष था, जिसे आज अक्षयवट के नाम से जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि यह वृक्ष आज भी प्रयागराज में विद्यमान है.

आरंभ से ही इसे प्रयाग के नाम से जाना जाता था, परन्तु मुस्लिम शासक अकबर ने इसका नाम 1583 में बदलकर इलाहाबाद रख दिया और इसे अल्लाह के शहर की संज्ञा दी जाने लगी. परन्तु वर्तमान समय में सरकार द्वारा इसे पुनः प्राचीन नाम प्रयागराज के नाम में परिवर्तित कर दिया गया है.

तो आज बात करते हैं, देवभूमि प्रयागराज के प्रयागघाट वार्ड की, जो वर्तमान में प्रयागराज नगर निगम का हिस्सा है. स्थानीय पार्षद के अनुसार वार्ड में लगभग 1,00,000 की आबादी है और यहां मतदाताओं की संख्या भी 50,000 के आसपास है. घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में मिश्रित आबादी का रहवास है.

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प्रयागघाट वार्ड में स्थानीय पार्षद के तौर पर समाजवादी पार्टी से उर्मिला यादव कार्य कर रही हैं और उनके पति रमेश चंद्र यादव पार्षद प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्रीय विकास कार्यों में अपनी भूमिका निभा रहे रहे हैं. मिश्रित आबादी वाला यह वार्ड बहुत व्यापक क्षेत्र में फैला हुआ है, और यह काफी सारे मोहल्लों में विभाजित है. इसमें आने वाले प्रमुख मौहल्लों में अल्लाह्पुर, घाडागंज जैसे कुछ पुराने मौहल्ले शामिल हैं.

_प्राचीन समय से ही
प्रयागराज को विद्या और ज्ञान का गढ़ कहा
जाता रहा है साथ ही देश का राजनीतिक व अध्या

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वार्ड की विशेषता है यहां के ऐतिहासिक घाट

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प्रयागराज के वार्ड प्रयाग घाट में स्थित दशाश्वमेध घाट बेहद प्राचीन है. यह घाट अपने मन्दिरों, आश्रमों, घाटों और मठों के लिए विशेषत: विख्यात है. वार्ड में मौजूद मंदिर यहां प्रसिद्द टूरिस्ट स्पॉट्स के तौर पर देखे जाते हैं. साथ ही यहां मंदिरों की संख्या भी काफी अधिक है, जिसके कारण दूर दूर से श्रृद्धालुगण यहां आते हैं. इस वार्ड के पंडालों का भी अपना अलग ही महत्व है. 

_प्राचीन समय से ही
प्रयागराज को विद्या और ज्ञान का गढ़ कहा
जाता रहा है साथ ही देश का राजनीतिक व अध्या   

वार्ड में यदि शिक्षा सुविधा की बात की जाए तो यहां सरकारी स्कूल की सुविधा नही है, परन्तु एक इंटर कॉलेज है, जिसमें लगभग 250 बच्चे पढ़ने आते हैं. इसके अतिरिक्त वार्ड में 10 प्राइवेट स्कूल हैं. स्थानीय पार्षद के अनुसार शिक्षा सुविधा यहां काफी बेहतर है. विद्यालय भी अच्छी स्थिति में है और अध्यापकों की भी संख्या काफी है.

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प्रयागराज को विद्या और ज्ञान का गढ़ कहा
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वार्ड में स्वास्थ्य सुविधा के लिए कोई सरकारी व प्राइवेट अस्पताल नही है. वार्ड से सटे कुछ हॉस्पिटल हैं, जिनमें लोगों को ईलाज के लिए जाना पड़ता है.  

रमेश चन्द्र यादव के अनुसार उनके वार्ड में सड़कों और नालियों से संबंधित समस्याएं काफी अधिक हैं. प्रयाग घाट का दायरा काफी बड़ा है, जिसके कारण यहां सफाई कर्मचारियों की संख्या भी अधिक होनी चाहिए, जिसका अभाव वार्ड में देखा जा सकता है. इसीलिए वार्ड में सफाई नही हो पाती.

References :

http://allahabadmc.gov.in/documentslist/Mohalla-ward-list.pdf 

https://prayagraj.nic.in/

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