Ranipur, Ward 59 (Varanasi)
Sanwara(Ballia-Rasra-221721)BallotBoxIndia treats a district's development like a shared fund, and every socio-political innovator — leader, NGO, business, expert, journalist, activist — like a contributor whose impact we try to measure. The scores here are an experiment to tell apart what an innovator actually moved (नेता का हाथ · their real contribution) from what circumstance carried (हालात · the wave).
About this research
भेलूपुर जोन की नगवा सबजोन के अंतर्गत आने वाला रानीपुर वार्ड वाराणसी नगर
निगम द्वारा संचालित वार्ड है. मिली जुली आबादी वाले इस वार्ड में वर्ष 2011 की
जनगणना के अनुसार लगभग 18,000 की आबादी का निवासस्थान है. इस वार्ड में आने वाले
प्रमुख मोहल्लों में जानकीनगर कॉलोनी, श्यामनगर कॉलोनी, श्री रामनगर, संत गोपाल
नगर, न्यू कॉलोनी, वैष्णो विहार, बड़ी पाटिया, शिवा एन्क्लेव, रानीपुर सादरी,
कैलाशपुरी आश्रम इत्यादि सम्मिलित हैं. साथ ही यहां मलिन बस्ती के आतुर पर रानीपुर
स्थित हैं.
यहां पार्षद प्रतिनिधि के तौर पर भारतीय जनता पार्टी से अजय कुमार गुप्ता जी
कार्यरत हैं, जो वर्ष 2017 से जन प्रतिनिधि के रूप में स्थानीय विकास कार्यों में
संलग्न हैं. वस्तुतः उनकी भाभी श्रीमती राजकुमारी गुप्ता इस क्षेत्र से पार्षद की
भूमिका में हैं. इस वार्ड में जीविका के साधन मिले जुले हैं, यानि यहां व्यापारी
वर्ग, छोटे लघु-कुटीर उद्योगों से जुड़ी जनता, छोटे व्यापार में संलग्न लोगों के
साथ साथ नौकरीपेशा जनता का भी निवास स्थान है, जिसमें सरकारी एवं प्राइवेट दोनों
ही सेक्टर से जुड़े लोग सम्मिलित हैं.
जनता की मौलिक सुविधाओं के तौर पर इस वार्ड में स्कूलों, बैंकों, एटीएम,
मंदिरों इत्यादि की भी सुविधा हैं. यहां शिक्षा सुविधा के रूप में मंजू श्री
बालिका स्कूल, राधाकृष्ण विद्यालय, शिवम भारतीय विद्यालय, आर एस जी पब्लिक स्कूल,
आर डी एम कान्वेंट स्कूल, बी एम एस स्कूल इत्यादि उपलब्ध है.
वार्ड की प्रमुख समस्याओं की बात की जाये तो स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि जी के अनुसार उनके
वार्ड का विस्तार काफी ज्यादा है, जहां अभी बहुत सी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है.
जिसमें सबसे प्रमुख समस्या सीवर, पेयजल, कच्ची गलियों और
सड़कों की है. क्षेत्र में बेहद संकरी और कच्ची गलियां है, जिनके चलते बारिश
के मौसम में कीचड़ व जलभराव के करण हालात और बदतर हो जाते हैं.
साथ ही सबसे प्रमुख समस्या पार्षदों को उनके सभी अधिकार प्राप्त न होना है. उनके अनुसार पार्षदों के पास विकास कार्यों की काफी जिम्मेदारी होती है. परन्तु उन्हें हर छोटे से छोटे कार्य को करने के लिए बड़े अधिकारीयों व महापौर को पत्र लिखना पड़ता है. इसी कारण कार्यों में विलम्ब होता है. आज के समय में यहां के निवासियों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. परन्तु अपनी स्वेच्छा से पार्षद क्षेत्र के विकास कार्य कर पाने में सक्षम नही होते.

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