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Ward 78, Civil lines (Kanpur)

Ward 78, Civil lines (Kanpur)

Harjinder Nagar(Kanpur Nagar--208007)
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Contribution ≈ Alpha Circumstance ≈ Beta Experimental · community-verified

About this research

वार्ड 78, सिविल लाइन्स कानपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाकों में से एक है, जिसे कानपुर के सबसे विकसित एवं स्वच्छ वार्ड के लिए सम्मानित किया गया है. गंगा किनारे बसे इस वार्ड के अंतर्गत मुख्य रूप से ऑर्डनेन्स टाउन, फूल बाग, ग्रीन पार्क, पुलिस लाइन, चर्च लेन, कॉपर लेन, कंपनी बाग, दूध वाला बंगला, बर्फखाना सहित कुछ बस्तियां एवं गंगा किनारे के घाट भी सम्मिलित हैं.

_वार्ड
78, सिविल लाइन्स कानपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाकों में से एक है, जिसे
कानपुर के सबसे

वर्ष 2017 के अनुसार वार्ड के परिसीमन की बात की जाये तोयह वार्ड उत्तर में गंगा नदी, दक्षिण में म्योर मिल तिराहे से नरौना चौराहे तक, पूर्व में कैन्टोमेंट रोड, नरौना चौराहे से भगवतदास घाट तक एवं पश्चिम में परेड से ग्रीन पार्क वाली सड़क तक विस्तृत है. वर्तमान में इस क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी का निर्वहन भारतीय जनता पार्टी से यशपाल सिंह जी कर रहे हैं, जो कि निरंतर दो बार से इस क्षेत्र में एक अनुभवी पार्षद के तौर पर कार्यरत हैं.

जनसांख्यिकी -

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जनगणना 2011 के अनुसार तकरीबन 12-15,000 की आबादी वाला सिविल लाइन्स वार्ड विशेषत: कम जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र है, जिसे कानपुर के चौथे सबसे कम जनसंख्या वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. जहां साक्षरता दर तकरीबन 90 प्रतिशत है.

इस वार्ड में लगभग 25 प्रतिशत लोग व्यापार, 40 प्रतिशत जनसंख्या नौकरी/लघु उद्योग एवं बस्तियों में रह रही आबादी मजदूरी, छोटे व्यवसायों से जुड़ी है. देखा जाये तो सिविल लाइन्स इलाका प्रशासनिक अधिकारियों एवं सरकारी कार्यालयों का गढ़ माना जाता है. यहां पॉश इलाकों में रह रहे लोग अधिकतर सरकारी अधिकारी अथवा बड़े व्यापारी हैं, वहीं यहां बसा माध्यम वर्ग प्राइवेट/सरकारी नौकरी या निज उद्योग आदि से जुड़ा है, तो बस्तियों में रहने वाले लोगों में ठेला लगाने वाले, दुकान चलाने वाले, रिक्शा चालक एवं नौकरीपेशा जनता भी शामिल है.

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वार्ड का इतिहास –

ब्रिटिश काल में बसा सिविल लाइन्स का इलाका अपने बहुत से स्थानों के चलते विशेष इतिहास रखता है, जैसे यहां स्थित “दूध का बंगला”, ब्रिटिश हुकूमत के समय दूध के व्यापार का चर्चित क्षेत्र हुआ करता था, जिसे बाद में आम जनता के रहवास के लिए परिवर्तित कर दिया गया. यहां मौजूद बर्फखाना भी कभी कच्ची बर्फ के कारोबार का प्रमुख स्थान था, परन्तु आज यहां आवासीय क्षेत्र बना हुआ है.

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वहीं उत्तरी सीमा पर गंगा नदी से जुड़े इस वार्ड में मौजूद घाट जैसे बाबा घाट, गुप्तार घाट, भगवत घाट, नारायण घाट, सरसैया घाट भी यहां नामचीन है और वार्ड के इतिहास में खासा स्थान रखते हैं. इन घाटों पर विविध मंदिरों के अतिरिक्त अंत्येष्टि क्रियाएं भी की जाती है.       

शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं –

शिक्षा सुविधाओं के लिहाज से सिविल लाइन्स वार्ड बेहद संपन्न है, यहां उत्तर प्रदेश एवं कानपुर के सर्वोत्तम विद्यालय एवं डिग्री कॉलेज मौजूद है. इस वार्ड में उत्तर प्रदेश का एकमात्र नगर निगम दवरा संचालित संगीत डिग्री कॉलेज भी उपस्थित है. तकरीबन 25-30 प्राइवेट विद्यालयों जैसे, बचपन प्ले सकुल, डॉ. वीरेन्द्र स्वरुप मेमोरियल पब्लिक स्कूल, स्टेपिंग स्टोन स्कूल इत्यादि के साथ साथ डीएवी डिग्री कॉलेज, एम.एस कॉलेज, जीएनके इंटर कॉलेज, एसएन इंटर कॉलेज, ताघौर बाल मंदिर बालिका इंटर कॉलेज इत्यादि की भी व्यापक सुविधा है.  

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78, सिविल लाइन्स कानपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाकों में से एक है, जिसे
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स्वास्थ्य सुविधाएं –

चिकित्सकीय सुविधाओं की बात की जाये तो सर्वोदय नगर में सरकारी अस्पतालों के साथ साथ बेहतर प्राइवेट हॉस्पिटल्स भी मौजूद हैं. यहां अंबा नर्सिंग होम , चंद्रकांता जवाहर हॉस्पिटल, भार्गव हॉस्पिटल एवं लाला अंबा प्रसाद स्मारक चिकित्सालय जैसे हॉस्पिटल उपलब्ध हैं, जो बेहतर चिकित्सा का विकल्प जनता के सामने रखते हैं.

परिवहन तंत्र –

कानपुर के सक्षम वार्डों में शामिल होने के कारण सर्वोदय नगर परिवहन सुविधा के लिहाज से कानपुर के अन्य वार्डों की तुलना में काफी बेहतर है. यहां ग्रीन पार्क बस स्टॉप, वूल्मर क्रासिंग बस स्टॉप, डीएवी क्रासिंग बस स्टॉप, पोर्तुगिज सेमेट्री बस स्टॉप जैसे बस स्टॉप्स की सुविधा जनता को प्राप्त है. इसके अतिरिक्त कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से यहां की दूरी मात्र 3.5 किलोमीटर है. 

अन्य मौलिक जनसुविधाएं –

जेड स्क्वायर मॉल, इएल मार्ट के अतिरिक्त बहुत सी मार्केट्स एवं ब्रांडेड शो रूम सिविल लाइन्स क्षेत्र में आते हैं, इसके अतिरिक्त स्थानीय सुविधाओं के तौर पर यहां नाना राव पार्क, परिवर्तन पार्क, आनंद स्वरुप पार्क, फूल बाग पार्क जैसे पार्क भी उपलब्ध हैं, जो स्थानीय जनता के टहलने एवं मनोरंजन के लिए अच्छे विकल्प हैं.

गौरतलब है कि सिविल लाइन्स वार्ड को बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के निवास स्थान एवं कार्यालयों का इलाका माना जाता है, यहां तकरीबन 60-70 आईएएस ऑफिसर्स बैठते हैं. वार्ड में मौजूद कानपुर नगर जिला न्यायालय परिसर, कानपुर हेड पोस्ट कार्यालय, सेंट्रल जेल (कानपुर), डीएम ऑफिस, आयकर विभाग कार्यालय, अकाउंट ऑफिस ओईएफ कानपुर, इनकम टैक्स वैल्यूएशन डिपार्टमेंट जैसे सरकारी कार्यालयों के साथ साथ आईडीबीआई ऑफिसर्स फ्लैट, भारतीय रिज़र्व बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया आदि भी उपस्थित हैं, जो वार्ड की आधुनिक एवं विकसित छवि को दर्शाते हैं.

साथ ही इस वार्ड में लठेश्वर महाराज मंदिर, श्री राधा कृष्णा मंदिर, श्री दुर्गा मंदिर, भगवत घाट मंदिर, कानपुर म्यूजियम, बाल भवन, किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉल भी विशेष आकर्षण का केंद्र हैं.

वार्ड की चर्चित हस्तियाँ –

सिविल लाइन्स वार्ड बहुत सी चर्चित हस्तियों का आवास एवं कार्यालयों का केंद्र रहा है. यहां पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर जी का कार्यालय स्थल हुआ करता था, जो आज छोटे कार्यालयों में विभाजित कर दिया गया है.

साथ ही माननीय डॉ. लक्ष्मी सहगल, जो कि वर्ष 1943 में अस्थायी आज़ाद हिंद सरकार की कैबिनेट में पहली महिला सदस्य बनीं और आज़ाद हिंद फ़ौज की रानी झाँसी रेजिमेंट में सक्रियता से कार्य किया, उनका आवास स्थान भी सिविल लाइन्स वार्ड ही था.

इसके अतिरिक्त नौटंकी विशेषज्ञ, चित्रकार, शिल्पकार एवं उपन्यासकार के साथ साथ कानपुर में सांस्कृतिक पत्रकारिता के जनक पंडित सिद्धेश्वर अवस्थी भी कचहरी रोड, सिविल लाइन्स में ही रहा करते थे. कहा जाता है कि चावल के दानों पर भी कलाकारी करने में माहिर थे, साथ ही वें अद्भुत संगीतज्ञ भी थे.    

वार्ड की प्रमुख समस्याएं –

सिविल लाइन्स वार्ड को स्वच्छता, हरीतिमा और बेहतर प्रबंध के लिए समस्त कानपुर में जाना जाता है. वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस वार्ड को कानपुर के 110 वार्डों में से सर्वश्रेष्ठ वार्ड का दर्जा मिलने के साथ साथ साढ़े 11 लाख की ईनाम राशि भी दी गयी थी. जिसका श्रेय यहां के पार्षद यशपाल सिंह जी को जाता है, जो किसी भी समस्या पर 24 घंटे के अन्दर ही कार्यवाही करने पर यकीन रखते हैं. यहां का विकास कार्य केवल निगम के द्वारा संचालित नहीं है, अपितु पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों, जल संस्थान इत्यादि का भी सहयोग विकास कार्यों में रहता है.

परन्तु यहां चार बस्तियां मौजूद हैं, जिनमें से दो केंट क्षेत्र में आती हैं. इन बस्तियों के अवैध होने के कारण इनके विकास कार्यों में बाधा आना स्वाभाविक है, जिस पर स्थानीय पार्षद द्वारा निरंतर ध्यान दिया जाता रहा है और इनके विकास से जुड़े कार्य भी जारी रहते हैं. इसके अतिरिक्त समस्त वार्ड में मानसून से पहले यहां विकास कार्य गति ले लेता है और क्षेत्र के नालों एवं नालियों की सफाई का कार्य जारी रहता है. 

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