दीपक अग्रवाल एक आईएएस अधिकारी हैं, जो कि वर्तमान में सहारनपुर के कमिश्नर के पद पर नियुक्त हैं. इससे पहले वह नोएडा अथॉरिटी में सीईओ थे. सहारनपुर में हुई हिंसा के बाद जून 2017 में सरकार द्वारा किये गये प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले में दीपक अग्रवाल को सहारनपुर का मंडलायुक्त बनाया गया, उन्हें राजस्व विभाग में सचिव पद से हटा कर उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है. उन्होंने अपनी शिक्षा Carnegie Mellon University (CMU), पीटर्सबर्ग से पूरी की है. सहारनपुर के कमिश्नर का पद ग्रहण करते ही उन्होंने पूरी निष्ठा व सक्रियता से काम करना प्रारंभ कर दिया. वह क्षेत्र में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं व व्यवस्थाओं पर अपनी नज़र रखते हैं तथा जहां जरूरत होती है, उचित सुधार व कार्यवाही भी करते हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गरीबों को कम दाम पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए अम्मा कैंटीन की तर्ज पर ‘प्रभु की रसोई’ नामक योजना की शुरुआत की गयी, जिसका उद्घाटन 9 अगस्त 2017 में सहारनपुर से किया गया. सहारनपुर में इस योजना के शुभारम्भ व सफलता में कमिश्नर साहब ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए बखूबी अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाहन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा, ‘प्रभु की रसोई’ योजना को सफल बनाने के लिए सिविल सोसाइटी और इंडस्ट्री की सहायता ली गयी है. राज्य में कई स्थानों पर गरीबों को मुफ्त भोजन दिया जाता है, लेकिन हम लोगों का उद्देश्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जहां पर गरीबों को सम्मान के साथ भोजन मिले सके.

दीपक अग्रवाल एक जिम्मेदार, सक्रिय व सख्त ऑफिसर हैं. उनके अनुसार क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अपराध, हिंसा व अव्यवस्था बिल्कुल भी बर्दास्त नहीं की जाएगी. हाल ही में सहारनपुर में हुए निकाय चुनाव के दौरान प्रशासन काफी सक्रिय था. कमिश्नर साहब ने चुनावों से पहले ही एक इंटरव्यू में कड़े शब्दों में स्पष्ट कर दिया था कि चुनावों में होने वाले दंगों और करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी तथा वोटर लिस्ट के हिसाब से ही वोटिंग प्रक्रिया पूरी होगी. इसके अलावा वह क्षेत्र में बढ़ रहे अपराधों व भ्रष्टाचार को रोकने के लिए निरंतर कार्यरत रहते हैं.

वह हमेंशा गलत कार्यों के खिलाफ सख्त रवैया अख्तियार करते हैं. उन्होंने नवम्बर में क्षेत्र में बढ़ रहे अवैध निर्माण तथा सुस्त पड़े सहारनपुर प्राधिकरण के खिलाफ जांच की. जिसके अंतर्गत उन्होंने प्राधिकरण दफ्तर में पहुंच कर सभी फाइलों को अपने कब्जे में ले लिया. जिनमें पाया गया कि प्राधिकरण उपभोक्ताओं की फाइलों से ज्यादा प्राथमिकता अवैध निर्माण वाली फाइलों को दे रहा है और उन्हीं पर सुनवाई कर रहा है. जिस कारण शहर अवैध निर्माण का गढ़ बन गया था तथा वहां कई जगहों पर अवैध निर्माण का काम चल रहा था. किन्तु कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने जेई से वीसी तक की रिपोर्ट मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव आवास को भेजकर प्राधिकरण की पोल खोल दी.
यही नहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी वह पहल करते रहते हैं. वह बच्चों की शिक्षा के प्रति काफी जागरूक हैं. समय-समय पर क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था तथा अन्य सरकारी योजनाओं का निरीक्षण करते रहते हैं. यही नहीं बल्कि दीपक अग्रवाल का ग्रामीण क्षेत्रों से भी खासा जुड़ाव रहता है. उन्होंने मल्हीपुर नामक एक गांव को गोद भी लिया है. मल्हीपुर के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में वह हर सप्ताह स्वयं बच्चों के बीच जाते हैं तथा उन्हें ज्ञान, विज्ञान व संस्कार की शिक्षा देते हैं. उनके आने से विद्यालय के छात्र- छात्राएं भी काफी उत्साहित रहतें हैं. इसके अतिरिक्त वह गांव के लिए अन्य विकास सम्बन्धी कार्य भी करते रहते हैं.

शांत स्वभाव और काम के प्रति गंभीर रहने वाले सहारनपुर के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल द्वारा शामली, के एक गांव झाल में निर्मल कृष्णा व हिंडन नदी के बचाव अभियान का शुभारंभ किया गया| उन्होंने इसके साथ साथ यहाँ वृक्षारोपण का भी कार्य और लोगों से इसकी अपील भी की और कहा कि मानव जाति के लिए वृक्षों का होना बेहद जरूरी है इसीलिए वृक्षों को बचायें और ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगायें. ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के सहयोग से यह अभियान चलाया गया जिसमें 5 हजार से अधिक वृक्षारोपण किये गए| मंडलायुक्त दीपक कुमार अग्रवाल ने ग्रामीणों व स्कूली छात्रों से भी अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की है. उन्होंने बताया कि मनुष्य को जीवन में एक वृक्ष जरूर लगाना चाहिए. दीपक अग्रवाल मेरठ मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार के साथ मिलकर निर्मल हिंडन अभियान में भी पूर्ण सहयोग दे रहे हैं. अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद उन्होंने शिवालिक रेंज में जाकर खुद हिंडन के उद्गम स्थल का मुआयना किया और लोगों से इस अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया.