Ishwar Singh
Budhanpur(Bijnor-Dhampur-246746)नाम – ईश्वर सिंह पद – विधायक, गुहला विधानसभा क्षेत्र (हरियाणा)नवप्रवर्तक कोड – 71184791ईश्वर सिंह, जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से गुहला चीका, हरियाणा के विधायक, एक प्रेरणादायक और समर्पित नेता हैं। अपने आदर्शों और सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा ने उन
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Biography & background — self/editorially authored, may be outdated
नाम – ईश्वर सिंह
पद – विधायक, गुहला विधानसभा क्षेत्र (हरियाणा)
नवप्रवर्तक कोड – 71184791
ईश्वर सिंह, जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से गुहला चीका, हरियाणा के विधायक, एक प्रेरणादायक और समर्पित नेता हैं। अपने आदर्शों और सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें राजनीति में एक विशिष्ट स्थान दिलाया है। जब वे विधायक बने, तब उनकी शिक्षा दसवीं तक ही सीमित थी। लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी लगन ने उन्हें अपने राजनीतिक जीवन के साथ-साथ शैक्षिक उन्नति के मार्ग पर भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
गुहला विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे श्री ईश्वर सिंह जननायक जनता पार्टी के अंतर्गत विधायक पद पर सेवाएं दे रहे हैं। जननायक जनता पार्टी का गठन दुष्यंत चौटाला के द्वारा किया गया था, मुख्य रूप से यह क्षेत्रीय पार्टी मानी जाती है और हरियाणा में बेहद प्रभावी माने जाने वाले चौटाला परिवार से इसकी जडें जुड़ी हुई हैं।

प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक करियर
ईश्वर सिंह का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने 1977 में हरियाणा विधानसभा के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। यह उनकी पहली बड़ी राजनीतिक उपलब्धि थी। उसी दौरान उन्हें हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का चेयरमैन बनने का भी अवसर मिला। हालांकि, यह पद उनके लिए एक उपलब्धि था, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि वे खुद केवल दसवीं पास हैं और 12वीं तक के छात्रों के लिए नीतियाँ बना रहे हैं। इस आत्मनिरीक्षण ने उन्हें अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षा के प्रति जागरूकता
ईश्वर सिंह मूल रूप से हरियाणा के कैथल जिले में आने वाले जदौला ग्राम के मूल निवासी हैं और विगत 40 वर्षों के राजनैतिक एवं सामाजिक अनुभव के आधार पर वह हरियाणा की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। गुहला चीका क्षेत्र का पहला विधायक बनने का गौरव भी उन्हें प्राप्त है, इसके साथ साथ वह वर्ष 2008-14 तक हरियाणा से राज्य सभा के सदस्य भी रह चुके हैं।
उन्होंने 73 वर्ष की उम्र में उन्होंने 84.6 प्रतिशत अंकों के साथ एम.ए. राजनीतिक विज्ञान प्रथम वर्ष की परीक्षा पास की। यह उनकी तीसरी एम.ए. डिग्री थी; इससे पहले उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और इतिहास में भी एम.ए. किया था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एल.एल.बी. और एल.एल.एम. की डिग्रियाँ भी प्राप्त की हैं।

समाजसेवा और संरचनात्मक विकास
ईश्वर सिंह एक समर्पित समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते हैं। वर्तमान में अपने कार्यकाल के दौरान वह अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। साथ ही गुहला चीका के विधायक के तौर पर, वे पंजाब सीमा से लगी सड़कों के सुधारीकरण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जिससे क्षेत्र का संरचनात्मक विकास हो सके।

अपने 1977 के कार्यकाल में ईश्वर सिंह ने गुहला को उपमंडल का का दर्जा दिलवाने से लेकर तहसील बनाने, बिजली घर बनवाने, अस्पताल बनवाने, हैफेड में बड़े गोदामों का निर्माण सहित बहुत से विकास कार्य करवाए, जिनका लाभ आज भी जनता को मिल रहा है। वर्तमान कार्यकाल में भी ईश्वर सिंह विभिन्न विकासात्मक योजनाओं से जुड़े हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर योगदान
ईश्वर सिंह पूर्व सांसद राज्यसभा और पूर्व सदस्य राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पदों पर भी कार्यरत रह चुके हैं। इन महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। आज भी वह वंचित वर्गों के उत्थान के लिए संकल्पित हैं और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ इन सभी वर्गों को मिल सके, इस दिशा में प्रयासरत रहते हैं।
प्रेरणादायक व्यक्तित्व
ईश्वर सिंह की जीवन यात्रा न केवल उनकी राजनीतिक और शैक्षिक उपलब्धियों को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि उम्र और परिस्थितियाँ कभी भी सीखने और आगे बढ़ने में बाधक नहीं बन सकतीं। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि समर्पण, मेहनत और निरंतरता से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। ईश्वर सिंह आज भी अपने क्षेत्र और समाज के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं।
ईश्वर सिंह की कहानी प्रेरणा, समर्पण और अटूट आत्मविश्वास की मिसाल है। उनकी शिक्षा के प्रति उनकी लगन, समाजसेवा के प्रति उनकी निष्ठा और संरचनात्मक विकास के प्रति उनका समर्पण उन्हें एक असाधारण नेता बनाता है। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि शिक्षा और सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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