परिचय
कन्हैया लाल दिवाकर जी राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। 1985 में सीपीआई से विधायक का चुनाव भी लड़ चुके हैं। वर्ष 1987 में राजपुर ब्लाक का उप ब्लाक प्रमुख पद पर कार्य करने का मौका मिला। इसके बाद उन्हें भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय काउंसिलिंग सदस्य बनाया गया।
कन्हैया लाल दिवाकर जी कानपूर देहात के सिकन्दरा विधान सभा रोहिणी गांव के मूल निवासी है। मजदूरी व खेती करने के साथ-साथ समाज सेवा को अपना उद्देश्य मानते हैं। वह बताते हैं कि राजनीति में उनका आने का उद्देश्य मजदूर, गरीबों की अवाज को उठाना है। समाज सेवा से जुड़ा रहना ही उनका जीवन है।
बचपन से ही सीखा संघर्ष
बचपन से ही आभावों का सामना करते आए ठाकुर प्रसाद जी का जीवन हमेशा संघर्षों में ही बीता है। उनके परिवार में कोई भी पढ़ा लिखा नहीं था। इसकेे लिए वह अपने क्षेत्र के लोगों के शिक्षा व्यवस्था में सहायता प्रदान करते आ रहे हैं। वह सीपीआई से जुड़ें और लगातार पार्टी के नीतियों के साथ कार्य करते रहे हैं। वही दूसरे बच्चों को भी पढ़ाई का महत्व समझाते थे। वह दूसरे बच्चों को पढ़ने के लिए जागरुक करते थे. वह बच्चों को बताते थे कि आप अगर पढ़ोगे नहीं तो आपके साथ हो रहे हैं शोषण को भी समझ नहीं पाओगे, आप अपनी लड़ाई नहीं लड़ पाओगे।
मुद्दें जिसपर काम करना जरूरी
लंबे अरसे से समाज सेवा के साथ साथ राजनीति में काम करते रहे ठाकुर प्रसाद जी आज भी अपने क्षेत्र के विकास के लिए लड़ रहे हैं। कन्हैया लाल दिवाकर जी का मानना है कि वह सबसे पहले जो जरूरत के कार्य हैं , जिसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है उस पर ध्यान देंगे। जैसे जगह-जगह गंदगी काफी है. नालीयां ढके हुए नहीं हैं, कचरे सड़कों पर बिखरे न हो, इससे बीमारियां फैलती हैं। चिकनगुनिया, डेंगू जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही सफाई कर्मचारियों को उचित मजदूरी मिले इसके लिए वह काम करेंगे।
बेबाक कन्हैया लाल
कन्हैया लाल दिवाकर बड़े ही बेबाक और मुद्दों पर आधारित राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने इलाकों में अनगिनत कार्य करवाए हैं। वह बड़े ही सहज ढंग से चाहे स्वास्थ्य हो, शिक्षा, अर्थव्यवस्था किसी भी मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखते हैं। इन्हीं कुछ मुद्दों से जुड़े प्रश्न हमने ठाकुर जी से भी किए और बड़ी ही बेबाकी से उन्होंने हमारे सभी प्रश्नों का जवाब दिया।