Mahendra Pratap Singh
Gomtinagar(Lucknow-Lucknow-226010)डेप्युटी चीफ़ कंजर्वेटोर ऑफ फॉरेस्ट, यू पी फॉरेस्ट डिपार्टमेन्ट के पद पर कार्यरत महेंद्र प्रताप सिंह ने कई पर्यावरण से जुड़ी हुई पुस्तकों को प्रकाशित किया है। महेंद्र प्रताप जी ने गंगा और साई नदी पर पर्यावरण को बचाने व उसके वनीकरण के अभियान का नेतृत्व
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Action research
Ward and district projects Mahendra Pratap Singh contributes to.
Contributions & updates
Articles, research and updates published by Mahendra Pratap Singh.
Biography & background — self/editorially authored, may be outdated
डेप्युटी चीफ़ कंजर्वेटोर ऑफ फॉरेस्ट, यू पी फॉरेस्ट डिपार्टमेन्ट के पद पर कार्यरत महेंद्र प्रताप सिंह ने कई पर्यावरण से जुड़ी हुई पुस्तकों को प्रकाशित किया है। महेंद्र प्रताप जी ने गंगा और साई नदी पर पर्यावरण को बचाने व उसके वनीकरण के अभियान का नेतृत्व भी किया है, जिसमें उन्होंने मंदिरों व आध्यात्मिकता के पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव के विषय पर ज़ोर दिया है।
महेंद्र प्रताप सिंह की कुछ मुख्य रचनाएँ इस प्रकार हैं :-
1. गांधी और कृष्ण - इलाहाबाद दिल्ली और पटना के प्रतिष्ठित प्रकाशक ‘प्रकाश महल द्वारा’ प्रकाशित है। यह कृति सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं धार्मिक समन्वय का मार्ग प्रशस्त करती है। कृति
प्राचीन समाजवादी अवधारणा के जनक श्री कृष्ण को आधुनिक संत महात्मा गांधी से जोड़ती
हुई सामाजिक अवधारणा का सशक्त प्रतिपादन करती है। भाषा सबके पढ़ने व समझने योग्य है।
2. गीता और कबीर – यह कृति
भी किताब महल द्वारा प्रकाशित है तथा सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक समन्वय का मार्ग प्रशस्त करती है। यह कृति प्रसिद्ध
समाज सुधारक महात्मा कबीर का मूल्यांकन गीता के परिपेक्ष्य में करती है।
3. नारी – कृति एक सशक्त महाकाव्य है तथा नारी संबंधी लोहिया के विचारों का पोषक है। नारी आंतरिक मनोभावों तथा अंतर्मन के संघर्षों के हृदय ग्राही चित्रण
है। इस कृति में मानव मन में चलने वाले श्रेय तथा प्रेम के बीच के अंतर्मन का प्रभावी
चित्रण है।
4. जिजीविषा – इस कहानी संग्रह में सामाजिक विषमताओं, पर्यावरणीय प्रदूषण, विकलांगों की समस्या, स्त्री शिक्षा आदि विषयों पर कहानी है।
5. प्रेम पथ – प्रेम की उत्ताद भावनाओं पर लिखा गया
उपन्यास है। प्रकृति से जोड़ते हुए प्रेम के लौकिक एवं अलौकिक के भेद को महत्वहीन
करते हुए समर्पण की पराकाष्ठा को मूल बताया है।
6 . नारद की भू यात्रा - पर्यावरण संरक्षण पर लिखा गया हिंदी का प्रथम काव्य है। यमुना रोती है, मधुवन की आत्मा बोली, प्रकृति
प्रगति संग्राम, धरती की पुकार, आज की दुनिया, वृन्दावन
वर्णन आदि अत्यंत अच्छी कविताएं हैं। इसे यदि प्रारम्भ कक्षाओं में पढ़ाया जाए तो पर्यावरण
संरक्षण के प्रति बच्चों में रुझान उत्पन्न होगा।
7. अभिव्यक्ति – वन्य जीवों पर लिखा गया हिंदी का प्रथम
उपन्यास है। उपेक्षित वन्यजीवों जैसे गिद्ध, सुअर और
कौआ आदि के प्रति तिरस्कार की भावना इसे पढ़कर लुप्त हो जाती है।
8. मानस में प्रकृति विषयक संदर्भ – कृति में तुलसी जी द्वारा वर्णित वनस्पतियों एवं
वन्य जन्तुओं का शोधपूर्ण वर्णन है। यह कृति ‘अयोध्या शोध अनुसंधान ‘ द्वारा अनुदानित
है।
9. वन और मन – कृति में पर्यावरण संबंधी कविताओं का संग्रह है। जलदान, गिद्ध के प्रति, विलायती
बबूल की व्यथा आदि अनेक कविताएं बार बार पढ़ने योग्य है।
10 . प्रायश्चित – यह पर्यावरण सम्बन्धी उपन्यास है, जिसका मुख्य पात्र कोई आदमी नही बल्कि पीपल है। पीपल आधुनिक
समाज में हो रही अपनी दुर्दशा की अभिव्यक्ति समाज के प्रत्येक वर्ग जैसे प्रत्येक वर्ग
जैसे धर्म के धर्मगुरु, शिक्षक, जन प्रतिनिधि, व्यापारी, पर्यावरणविद आदि के समक्ष करता है।
बड़े परिश्रम एवम बलिदान के बाद उसे आशा की एक किरण दिखाई देती है।
11. तुलसी की अंतर्दृष्टि – अयोध्या
शोध संस्थान की सहायता से प्रकाशित गोस्वामी तुलसीदास जी पर शोध ग्रंथ। इस कृति में
तुलसीदास जी के विचारों का वर्तमान समाज में प्रासंगिक की दृष्टि से अनुशीलन किया गया
है ।
12. भारत के संरक्षित वन – इस कृति में भारत के समस्त राष्ट्रीय
उद्यानों, वन्यजीवों बिहारों एवं प्राणी उद्यानों
के सम्बन्ध में विस्तृत विवेचन किया गया है। इस विषय में यह कृति हिंदी भाषा मे प्रथम
कृति है। इसका प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा किया गया है।
13. पांचाली - कृति पांचाली के माध्यम से नारी से संघर्ष एवं जिजीविषा को प्रतिबिंबित करती है। यह परिवार के प्रति समर्पित, भावुक एवं
संघर्षशील नारी के जीवन की महा गाथा है।
14. भारतीय वन उपज - भारत मे पाई जाने वाली प्रकाष्ठ प्रजातियां, जड़ी -बूटी एवं औद्योगिक प्रजातियों के सम्बंध में सचित्र जानकारी दी गयी है। इसका प्रकाशन बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा किया गया है।
अन्य प्रमुख संपादित पुस्तकें
1. श्री रवि गौड़ के साथ ‘समकालीन विमर्श : मुद्दे और बहस’ का संपादन किया गया, जिसे अन्नग प्रकाशन दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया और इसके अतिरिक्त ‘जगदीश गुप्त का काव्य : मनन और मूल्यांकन’ का सहसंपादन, जो प्रोफेसर हरिशंकर मिश्रा एवं श्री रवि गोड़ के साथ संपादित किया गया।
3. वाल्मीकि की पर्यावरण चेतना (भाग-2,नदियां और पर्वत ) : वाल्मीकि रामायण में वर्णित वाल्मीकि कालीन नदियों की अद्यतन स्थिति, उनके आधुनिक नाम एवं सामान्य विवरण का उल्लेख किया गया है। यह कृति “वाणी प्रकाशन“ के माध्यम से प्रकाशित है।
3. वाल्मीकि की पर्यावरण चेतना (भाग-3, जीव-जंतु और राम वनगमन पथ की वनस्पतियां ) : वाल्मीकि रामायण में वर्णित वाल्मीकि कालीन… जीव जन्तुओं की अद्यतन स्थिति, उनके वैज्ञानिक नाम एवं विशिष्ट गुणों का सचित्र वर्णन है। यह कृति “वाणी प्रकाशन“ के माध्यम से प्रकाशित है।
4. श्रीमदभागवत का वनस्पति संसार : श्रीमदभागवत में वर्णित वनस्पतियों की अद्यतन स्थिति, उनके आधुनिक नाम एवं सामान्य विवरण का उल्लेख किया गया है। यह कृति प्रकाशनाधीन है।
5. हमारा पर्यावरण : पर्यावरण के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है जो
शोध छात्रों, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक व्यक्तियों
एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले परीक्षार्थियों के लिए विशेष उपयोगी है।
हिंदी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा उपरोक्त 12 कृतियों पर एम० फिल० हिंदी उपाधि का शोध कराया गया। शोध निर्देशकों प्रो० हरिशंकर मिश्र तथा शोधार्थी श्री रवि कुमार गौड़ एवं शोध का विषय "श्री महेंद्र प्रताप सिंह की साहित्य साधना" है तथा पुस्तक के रूप में प्रकाशित भी की गयी है।
प्रमुख सम्मान एवं उपाधियां
1. विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, गाँधी नगर
द्वारा दिनांक 13 दिसंबर ,2011 को विद्यावाचस्पति
की उपाधि के लिए अधिकृत किया गया।
2. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिनांक 05.06.2009 को कृति।
‘प्रायश्चित ‘ पर ‘मेदिनी’ पुरस्कार प्रदान किया गया।
3. हिन्दी साहित्य उत्तरप्रदेश के तत्वावधान में दिनांक 14.09.2009 को मा० मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश द्वारा “सौहार्द” सम्मान
से अलंकृत।
4. हिंदी भाषा, साहित्य व भारतीय संस्कृति के विकास
में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत में मॉरीशस के उच्चायुक्त महामहिम श्री दनीलाल शिव
द्वारा दिनाँक 19.10.2003 को “राष्ट्र गौरव सम्मान" से
अलंकृत।
5. राज्य कर्मचारी साहित्य परिषद, उत्तरप्रदेश, लखनऊ द्वारा करती "प्रायश्चित" पर फरवरी -2008 में ‘पंडित विद्यानिवास मिश्र’ पुरस्कार प्रदान किया गया।
6. संस्था 'कादम्बरी' जबलपुर द्वारा कृति ‘प्रायश्चित’ पर नवंबर-2009 में ‘स्व० श्री नर्मदा प्रकाश खरे’ पुरस्कार से सम्मानित
किया गया।
7. हिंदी साहित्य संस्थान, उत्तरप्रदेश, लखनऊ द्वारा कृति "गीता व कबीर" के लिए सम्मान।
8. मानव संगम कानपुर द्वारा करती ‘अभिव्यक्ति’ एवम ‘मानस के कृति विषयक संदर्भ’ के लिए सम्मानित।
9. जेमिनी संस्थान, पानीपत, हरियाणा द्वारा हिंदी सेवा समिति सम्मान।
10. “हरित अभियान 2001 “ के अंतर्गत पुस्तक लेखन हेतु महमहिम श्री राज्यपाल उत्तरप्रदेश, श्री विष्णुकांत शास्त्री जी द्वारा दिनाँक 20.09.2001 में गन्ना संस्थान, लखनऊ में सम्मानित।
11. “पर्यावरण दीप यज्ञ “कार्यक्रम में दिनाँक 15.03.2002 को वन मंत्री, उत्तरप्रदेश द्वारा सम्मानित।
12. गीतांजलि फाउंडेशन द्वारा दिनाँक 03.08.2011 ‘डॉ जगदीश गुप्त ‘ सम्मानित।
13. वानिकी को जन आंदोलन का रूप देने हेतु राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान में दिनाँक 17.04.2001 को सम्मानित।
14. पुस्तक लेखन हेतु दिनाँक 13.10.2001 को वाराणसी में सम्मानित।
15. सरिता लोक सेवा संस्थान, सुल्तानपुर द्वारा कृति ‘पांचाली’ को पुरस्कृत किया।
अन्य साहित्यिक उपलब्धियां
1. विभिन्न समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में लेखों, कविताओं एवम कहानियों का प्रकाशन।
2. सभी प्रकाशित कृतियों की समीक्षा दैनिक जागरण, स्वतन्त्र भारत एवं प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित।
3. उपन्यास 'अभिव्यक्ति' का अंग्रेजी अनुवाद “Manifestation” प्रकाशनाधीन है।
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