Sitaram Keshri
Sanwara(Ballia-Rasra-221721)नाम : सीताराम केशरी पद : पार्षद (कांग्रेस), वार्ड – 57, गोलादीनाथ (वाराणसी) नवप्रवर्तक कोड़ : 71183856 परिचय लगभग 20 वर्षों के राजनीतिक एवं सामाजिक अनुभव के साथ जन प्रतिनिधि के रूप में वाराणसी कार्यक्षेत्र में सक्रिय सीताराम केशरी जी वर्ष 2000 से
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Affiliations
Parties and institutions Sitaram Keshri is linked to. Estimated from public activity.
Political parties
Action research
Ward and district projects Sitaram Keshri contributes to.
Contributions & updates
Articles, research and updates published by Sitaram Keshri.
Biography & background — self/editorially authored, may be outdated
नाम : सीताराम केशरी
पद : पार्षद (कांग्रेस), वार्ड – 57, गोलादीनाथ
(वाराणसी)
नवप्रवर्तक कोड़ : 71183856
परिचय
लगभग 20 वर्षों के राजनीतिक एवं सामाजिक अनुभव के साथ जन प्रतिनिधि के रूप में वाराणसी कार्यक्षेत्र में सक्रिय सीताराम केशरी जी वर्ष 2000 से निर्बाध पार्षद पद पर अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं.

मूल रूप से छोटी पियरी, वाराणसी के निवासी सीताराम जी
व्यवसायिक तौर पर ड्राई फ्रूट्स एवं मसालों के कारोबार से जुड़े हैं और राजनीतिक
तौर पर वें वाराणसी के वार्ड 57, गोलादीनाथ से कांग्रेस पार्टी के बैनर तले पार्षद
हैं. उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विगत 19 सालों से
जनता ने अपार समर्थन से केवल उन्हें ही अपने वार्ड में पार्षद पद पर नियुक्त होने
का अवसर दिया है.
राजनीतिक जीवन
यद्यपि सीताराम जी का उद्देश्य कभी राजनीति से जुड़ना नहीं था, तदापि स्थानीय जनता ने उनके सामाजिक कल्याण के कार्यों को देखते हुए उन्हें राजनीति में शामिल होने की ओर प्रोत्साहित किया. सीताराम जी के अनुसार शुरुआत में जनता उनके पिताजी के सम्मान और प्रतिष्ठा को देखते हुए मतदान किया करती थी..किन्तु धीरे धीरे उनके द्वारा किये गए विकास कार्यों को देखते हुये उन्हें जनता का निर्बाध समर्थन मिलना आरम्भ हो गया.

लीक से हटकर चलने की आदत के चलते सीताराम जी ने कांग्रेस पार्टी को चुना और उसी के माध्यम से राजनीति में सक्रिय होने का निर्णय भी लिया. आज वें गोलादीनाथ वार्ड से पार्षद पद के साथ साथ कांग्रेस पार्टी से नगर अध्यक्ष भी हैं और साथ ही कांग्रेस पार्षद दल के नेता भी हैं. केवल यही नहीं, वाराणसी के किराना व्यापार मंडल से अध्यक्ष के रूप में भी सीताराम जी व्यापारियों के हितों की रक्षा हेतु प्रयासरत हैं.

बकौल सीताराम जी, प्रसिद्द राजनेताओं के निवासस्थान के रूप
में जाना जाने वाला गोलादीनाथ वार्ड कांग्रेस पार्टी को अधिक समर्थन नहीं दिया
करता था, किन्तु उन्होंने इस वार्ड के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसके चलते
स्थानीय जनता ने पार्टी को अनदेखा करते हुए मात्र सीताराम जी को ही अपने
जन-प्रतिनिधि के रूप में हर बार चुना.
वाराणसी शहर में सीवर समस्या सबसे बड़ी परेशानी
सीताराम जी के अनुसार उनके वार्ड में विकास कार्य सुचारू
रूप से चलता रहता है, जिसके चलते सड़कों, नालियों, स्वच्छता, विद्युत इत्यादि मौलिक
सुविधाओं में कोई भी कमी नहीं हैं. साथ ही विगत 19 वर्षों में उन्होंने अपने
क्षेत्र में सतत विकास कार्य किया है, जिसके चलते उनके वार्ड में कोई समस्या नहीं
है.
किन्तु वाराणसी के शहरी भाग में सीवर समस्या को सीताराम जी
समस्त वाराणसी की सबसे बड़ी समस्या मानते हैं. उनके अनुसार वर्ष 2008 में सीवर
प्रबंधन का कार्य नगर निगम के हाथों से लेकर जलकल विभाग को सौंपा गया था, जिसके
उपरांत से सीवर व्यवस्था का बुरा हाल है. चूंकि सीवर व्यवस्था भूमिगत मसला है, तो
इससे पेयजल लाइन भी प्रभावित होती है और दूषित सीवरयुक्त पानी घरों में जाता है,
जो चिंता का विषय है.
संपन्न विकास कार्य
बिजली पोल, ट्रांसफार्मर, टयूबवेल्स, सड़कों-नालियों को
दुरुस्त रखना इत्यादि नियमित मुद्दों पर बेहतर तरीके से कार्य करवा चुके सीताराम
जी का कहना है कि उनके वार्ड में छोटी पियरी मोहल्ला के अंतर्गत विगत 80 वर्षों से
पुलिस चौकी की एक विवादित जमीन पड़ी हुई है, जिस पर पहाडनुमा मलबे का ढेर जमा था,
जिससे जनता को परेशानी उठानी पड़ रही थी. उस ओर वाहन भी नहीं जा पाते थे, जिससे यह
समस्या ओर अधिक बढ़ती जा रही थी. जिसके चलते सीताराम जी ने तमाम अडचनें झेलते हुए
भी उस क्षेत्र को मलबामुक्त कराया. इस विकास कार्य को वें अपने कार्यकाल की सबसे
बड़ी उपलब्धि मानते हैं.
राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार
राष्ट्र को मजबूती देने के लिए सरकार की निचली इकाई यानि स्थानीय पार्षदों को मजबूती देने को सीताराम जी सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हैं. उनके अनुसार 74वां संशोधन लागू होने के बाद से राजनीतिक पदों और नामों के चयन में तो बदलाव हुआ, जैसे सभासद को पार्षद कर दिया गया, मेयर को महापौर कर दिया गया..किन्तु जनता के बीच में खड़े होने वाले उनके प्रतिनिधियों को कोई मजबूती नहीं दी गयी. इसलिए इस संशोधन में बदलाव होना सीताराम जी समय की मांग बताते हैं.

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