Kamalgadha, Ward 78 (Varanasi)
South Avenue(Central Delhi--110011)BallotBoxIndia treats a district's development like a shared fund, and every socio-political innovator — leader, NGO, business, expert, journalist, activist — like a contributor whose impact we try to measure. The scores here are an experiment to tell apart what an innovator actually moved (नेता का हाथ · their real contribution) from what circumstance carried (हालात · the wave).
About this research
पौराणिक नगरी वाराणसी की आदमपुर जोन एवं सबजोन के अंतर्गत आने वाला कमलगढ़हा
वार्ड तकरीबन 0.095 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और मिश्रित आबादी
वाले इस वार्ड में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 18,000 के आस पास जनसंख्या का
निवास है. स्थानीय पार्षद के अनुसार वार्ड में मतदाताओं की संख्या तकरीबन 10,000
के आस पास है.
यहां पार्षद के तौर पर कांग्रेस पार्टी से मलका नूरजहाँ जी कार्यरत हैं और उनके पति गुलशन अली अंसारी जी पार्षद प्रतिनिधि के रूप में स्थानीय विकास कार्यों में संलग्न हैं. यह वार्ड बेहद अधिक विकसित नहीं है. वार्ड में आजीविका के साधनों की यदि बात की जाये तो यहां बुनकरों की संख्या अधिक है, जो विगत काफी वर्षों से बुनकरी के कारोबार में संलग्न हैं. इसके अतिरिक्त छोटे व्यापारियों, लघु उद्योग कर्मियों की आबादी भी इस वार्ड में निवास करती है.

जनता की मौलिक सुविधाओं के तौर पर यह वार्ड अत्याधिक विकसित नहीं कहा जा सकता
है. यहां अच्छे अस्पतालों, बड़े विद्यालयों, सरकारी शिक्षा केन्द्रों सहित अन्य
पब्लिक यूटिलिटी के साधनों का अभाव देखा जा सकता है. वस्तुतः यहां शिक्षा सुविधा
के रूप में श्री हरि विद्यालय, प्राइमरी स्कूल कमलगढ़हा, अहलुम गर्ल्स स्कूल, मदरसा
इत्यादि उपलब्ध है. यहां पार्क, बैंकिंग सुविधा भी नहीं हैं.
वार्ड की प्रमुख समस्याओं की बात की जाये तो कमलगढ़हा से पार्षद प्रतिनिधि गुलशन जी का कहना है कि उनके वार्ड में सीवर की समस्या बहुत अधिक है. उनके अनुसार यहां सीवर व्यवस्था लगभग 40-50 साल पुरानी है, जो आज की आबादी के हिसाब से जर्जर हो चुकी है. वर्तमान में निगम लगातार धन की कमी का हवाला देता रहता है, साथ ही सफाई कर्मचारियों का भी बेहद अभाव है.

गुलशन जी के अनुसार पूर्व में सरकार से जो अनुदान आता था, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उसकी व्यवस्था नहीं है. अब केवल कागजों पर कार्यवाही होती है, जबकि वास्तविक समस्या पर कोई कदम नहीं उठाया जाता, जिसके चलते वार्ड में सीवर समस्या जस की तस है.

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