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Swargdwar (Ayodhya) Ward – 55

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About this research

सरयू के दक्षिणी तट पर बसी अयोध्या नगरी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के पुरखों की नगरी माना जाता है. प्राचीन काल में यह नगरी साकेत अथवा कौशल देश के नाम से भी सर्वविख्यात थी. “अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या”, यानी आठ चक्रों और नौ द्वारों से युक्त अयोध्या साक्षात् ईश्वर की नगरी है..वेदों में वर्णित इस नगरी को स्वर्ग की उपाधि दी गयी है. कहा जाता है कि यह सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी हुआ करती थी और बीतते वक्त के साथ साथ यहां हिंदू, बौद्ध, जैन एवं मुस्लिम धर्म आदि धर्मों का भी प्रभाव देखा जा सकता है. सातवीं शताब्दी में भारत आये चीनी यात्री ह्वेनसांग के लेखों में भी कहा गया है कि अयोध्या में लगभग 20 बौद्ध मंदिर और अनेकों बौद्ध भिक्षुकों का वास था.

_सरयू के दक्षिणी तट पर बसी अयोध्या नगरी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के
पुरखों की नगरी माना जाता ह

तो रुख करते हैं इसी पतित पावन अयोध्या नगरी के स्वर्गद्वार वार्ड का...जिसे स्वर्ग समान अयोध्या नगरी का प्रारंभिक बिंदु के रूप में देखा जाता है. यह वार्ड अपने आप में बेहद खास है क्योंकि यही से अयोध्या की प्रसिद्द पंचकोसी परिक्रमा का आरंभ और अंत होता है. यहां अयोध्या के विख्यात मंदिर और घाट भी स्थित हैं, जिनका पौराणिक महत्व काफी अधिक है. अयोध्या और फैजाबाद नगर पालिका के विलय से पूर्व यह वार्ड अयोध्या नगर पालिका का ही एक हिस्सा था, जो अब नगर निगम अयोध्या द्वारा संचालित किया जाता है.   

_सरयू के दक्षिणी तट पर बसी अयोध्या नगरी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के
पुरखों की नगरी माना जाता ह

इस वार्ड से पार्षद के रूप में समाजवादी पार्टी से श्री महेंद्र कुमार शुक्ल स्थानीय विकास कार्यों में संलग्न हैं. मिली जुली आबादी वाले इस वार्ड के परिसीमन की बात की जाये तो यह उत्तर में सरयू नदी तक, दक्षिण में तुलसी उद्यान से पाली मन्दिर के सामने से होते हुए राजेन्द्र निवास तक, पूरब में पुराने पुल से मुख्य मार्ग होते हुए तुलसी उद्यान तक एवं पश्चिम में राजेन्द्र निवास से गौही मंन्दिर धर्मशाला होते हुए सरयू नदी तक विस्तृत है. वार्ड के प्रमुख मोहल्लों में स्वर्गद्वार, उर्दुबाज़ार मोहल्ला, लक्ष्मण घाट आंशिक, नया घाट, राम की पैडी आंशिक इत्यादि प्रमुख हैं.

_सरयू के दक्षिणी तट पर बसी अयोध्या नगरी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के
पुरखों की नगरी माना जाता ह

नागेश्वरनाथ मंदिर, राम की पैडी, नया घाट, तुलसी उद्यान, विश्वकर्मा मंदिर, नरसिंह भवन, ग्वालियर मंदिर, श्री काले राम मंदिर आदि यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं. इसके साथ ही वार्ड की शिक्षा सुविधा की बात यदि की जायें तो यहां अवध विद्या मंदिर जूनियर हाई स्कूल, पूर्व माध्यमिक विद्यालय, एसएमबी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सहित अन्य प्राइवेट विद्यालय भी मौजूद हैं, जो छात्रों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था मुहैया कराते हैं.

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नागेश्वरनाथ मंदिर  

स्वर्गद्वार वार्ड का सबसे प्रसिद्द स्थान है नागेश्वर मंदिर, जिसके विषय में मान्यता है कि नागेश्वर नाथ मंदिर को भगवान राम के पुत्र कुश के द्वारा बनवाया गया था. माना जाता है जब कुश सरयू नदी में नहा रहे थे, तो उनका बाजूबंद खो गया था, जो बाद में एक शिवभक्त नागकन्या को मिला. इस कन्या को कुश से प्रेम हो गया, जिसके भगवान शिव के प्रति असीम भक्ति भाव को देखते हुए कुश ने उसके लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया. साथ ही कहा जाता है कि यही एकमात्र मंदिर है जो विक्रमादित्य के काल में सुरक्षित रहा, जबकि बाकी शहर खंडहर में तब्दील हो चुका था. हर वर्ष शिवरात्रि पर यहां देशभर से श्रृद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.

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गोस्वामी तुलसीदास को समर्पित है तुलसी उद्यान  

गोस्वामी तुलसीदास को समर्पित तुलसी उद्यान स्वर्गद्वार वार्ड में स्थित एक बगीचा है, अयोध्या-फैजाबाद रोड पर आने वाले इस बगीचे को पहले विक्टोरिया पार्क के रूप में जाना जाता था तथा इस पार्क के मध्य में रानी विक्टोरिया की एक मूर्ति थी. वर्ष 1960 में इसे तुलसी उद्यान का नाम दिया गया और इसमें गोस्वामी तुलसीदास की एक मूर्ति स्थापित की गई.

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दीपोत्सव के लिए प्रसिद्द है राम की पैडी

सरयू नदी के घाटों की श्रृंखला पर स्थित राम की पैड़ी भी स्वर्गद्वार वार्ड से ही सटी हुयी है. पूर्णिमा के दिन इस स्थान की सुन्दरता देखते ही बनती है, जब लोग यहां दूर दूर से स्नान और दीप दान के लिए पहुंचते हैं. श्रधालुओं में ऐसी मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं, उद्यान एवं जलाशय यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं. यहां दिवाली के अवसर पर प्रत्येक वर्ष भव्य दीपोत्सव मनाया जाता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से सैनानियों की भीड़ यहां उमड़ती है.  

_सरयू के दक्षिणी तट पर बसी अयोध्या नगरी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के
पुरखों की नगरी माना जाता ह

यदि वार्ड की प्रमुख समस्याओं पर गौर किया जाये तो अपने क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों को लेकर पार्षद महेन्द्र शुक्ला का कहना है कि उनके वार्ड में सीवर व वाटर लाइन की अव्यवस्था सबसे बड़ी समस्या है. हाल ही में दीपोत्सव आयोजन से पहले उन्होंने मुख्य सचिव आरके तिवारी को ज्ञापन सौंपकर सीवर लाइन के कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल भी उठाया, उन्होंने ज्ञापन में ध्यानाकृष्ट करते हुए कहा कि सीवर लाइन जहां-जहां डाली जा रही है, वहां की सड़कें नहीं बनाई जा रही हैं और कई स्थानों पर सीवर लाइन चौक भी पड़ी है.

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पुरखों की नगरी माना जाता ह

इसके अतिरिक्त वार्ड में कई पुरानी सड़कें जर्जर हालत में हैं, जिससे जनता को काफी परेशानी होती है. उनका कहना है कि इन समस्याओं के निस्तारण के लिए उनका संघर्ष जारी है.     

_सरयू के दक्षिणी तट पर बसी अयोध्या नगरी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के
पुरखों की नगरी माना जाता ह

Refrences:

1. http://nagarnigamayodhya.in/hi

2. http://nagarnigamayodhya.in/pages/hi/topmenu-hi/hi-about-us/hi-ward-mohallas

3. https://www.jagran.com/uttar-pradesh/faizabad-16445431.html

4.  http://uttarpradesh.gov.in/en/details/tulsi-udyan/32003400

5. https://ayodhya.nic.in/tourist-place/ram-ki-paidi/

6. http://uptourism.gov.in/post/hi/nageshwarnath-temple

  

Contributors

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स्वर्गद्वार, अयोध्या में पार्षद महेंद्र शुक्ल ने शुरू कराया सीवर लाइन सफाई अभियान

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