संक्षिप्त परिचय -
उत्तराखंड के उधम सिंह जिले को 'भोजन का कटोरा’ और ‘चावल की नगरी’ के रूप में जाना जाता है, जिसे जिले के नाम पर रखा गया। उधमसिंह नगर पहले नैनीताल जिले में था। लेकिन अक्टूबर 1995 में इसे अलग जिला बना दिया गया। इस जिले का नाम स्वर्गीय उधम सिंह के नाम पर रखा गया है। जिले का मुख्यालय रुद्रपुर में स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका नाम एक आदिवासी प्रमुख राजा रुद्र चंद्र के नाम पर पड़ा था। इतिहास के अनुसार, 1588 में, मुगल सम्राट अकबर ने यह भूमि राजा रुद्र को सौंप दी, जिन्होंने तराई को लगातार आक्रमणों से मुक्त कराने के इरादे से एक सैन्य शिविर स्थापित किया। एक बड़े पैमाने पर औद्योगिक और कृषि जिला, उधम सिंह नगर अक्टूबर 1995 में एक अलग जिले की पहचान पाने से पहले नैनीताल जिले का एक हिस्सा था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि -
इतिहासकारो के मुताबिक, सैकड़ों साल पहले गांव रूद्रपुर को भगवान रूद्र के एक भक्त या रुद्र नाम के हिंदू आदिवासी प्रमुख ने स्थापित किया था, जो कि रुद्रपुर शहर का आकार लेने के लिए विकास के चरणों के माध्यम से पारित हुआ है। इसके बाद रुद्रपुर का महत्व बढ़ गया है क्योंकि यह जिला उधम सिंह नगर का मुख्यालय है। इसके बाद मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल के दौरान 1588 में इस भूमि को राजा रुद्र चंद्र को सौंप दिया गया था। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान, नैनीताल को एक जिला बना दिया गया और 1864 से लेकर 1865 में तराई और भावर को “तराई और भावर सरकारी अधिनियम” के तहत रखा गया, जिसे ब्रिटिश मुकुट द्वारा सीधे नियंत्रित किया गया। वहीं कश्मीर, पंजाब, केरल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, गढ़वाल, कुमाऊं,बंगाल,हरियाणा,राजस्थान, नेपाल और दक्षिण भारत के लोग इस जिले में समूहों में रहते हैं। बता दे कि यह जिला कई धर्मों और व्यवसायों के लोगों के साथ विविधता में एकता का उदाहरण भी है।
भौगोलिक स्थिति -
जिले की भौगोलिक स्थिति की ओर चले तो इसका भौगोलिक क्षेत्रफल 3055 वर्ग कि. मी है। इसका अक्षांश 28 डिग्री उत्तर से 58 डिग्री उत्तर में स्थित है। जिसका देशांतर 78 डिग्री पूर्व से 81 डिग्री पूर्व में है। जिले की भूमि पहाड़ी के पैरो से घिरी हुई है। यहां की मृदा जलोढ़ है जो कि अत्यधिक उपजाऊ हैं जो की कृषि उद्योग, फसल और खनन के लिए उपयोग होतीं है। इसकी भूमि पर चावल, गेहूं, सरसो, गन्ना, सूरजमुखी, अरहर दाल, आलू, टमाटर, प्याज, बैग़न, मटर, सेम, लौकी उगाया जाता है।
प्रशासनिक विभाजन -
इस जिले के प्रशासन के अनुसार, पौराणिक काल में इसपर रूद्र वंश का शासन रहा इसके बाद वर्तमान में उधम सिंह नगर 7 जिलों, 19 उपजिलों, 688 गावों में विभाजित हो गया। उधम सिंह जिले में बाजपुर, गदरपुर, जशपुर, काशीपुर, खटीमा, कीक्छा, नानकमत्ता, सितारगंज, नामक 9 तहसील शामिल है।
जनसांख्यिकी -
उत्तराखंड के जनगणना संचालन निदेशालय द्वारा उत्तराखंड के एक जिले उधम सिंह नगर का आधिकारिक जनगणना 2011 विवरण जारी किया गया है। । 2011 में, उधम सिंह नगर की जनसंख्या 1,648,902 थी, जिसमें पुरुष और महिलाएं क्रमशः 858,783 और 790,119 थीं। इसके बाद 2001 की जनगणना में, उधम सिंह जिले की जनसंख्या 1,235,614 थी, जिसमें पुरुष 649,484 थे और शेष 586,130 महिलाएँ थीं। उधम सिंह नगर जिले की जनसंख्या महाराष्ट्र की कुल जनसंख्या का 16.35 प्रतिशत है। 2001 की जनगणना में उधम सिंह नगर जिले का यह आंकड़ा महाराष्ट्र की आबादी का 14.55 प्रतिशत था। वहीं 2001 की तुलना में जनसंख्या में 33.45 प्रतिशत का परिवर्तन हुआ। भारत की पिछली जनगणना 2001 में, उधम सिंह नगर जिले की जनसंख्या में 1991 की तुलना में 33.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पर्यटन स्थल -
जिले की सुंदरता के कारण यहां पर कई अति सुन्दर दर्शनीय स्थल है -
1. पूर्णागिरी मंदिर -
पूर्णागिरी मंदिर शक्तिपीठ के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान टनकपुर से 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर पर्वत के सबसे ऊंचे हिस्से में है। हर साल काफी संख्या में श्रद्धालु पूर्णागिरी के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्र के अवसर पर यहां बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है।
2. अटरिया मंदिर -
इस मंदिर में अटरिया माता की पूजा की जाती है। हर साल काफी संख्या में भक्तगण इस मंदिर में आते हैं। नवरात्रों के अवसर पर यहां दस दिनों के मेले का कार्यक्रम होता है। अटरिया मंदिर रुद्रपुर-हल्द्वानी मार्ग से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
3. गिरी सरोवर -
गिरी सरोवर बहुत ही खूबसूरत झील है। यह जगह पिकनिक स्थल के रूप में भी जानी जाती है। गिरी सरोवर काशीपुर-रामनगर मार्ग पर स्थित है। जो कि लगभग दो किलोमी. की दूरी पर स्थित है।
4. चैती मंदिर -
चैती मंदिर का नाम माता चैती देवी ने नाम पर रखा गया है। इसे माता बालासुन्दरी मन्दिर भी कहा जाता है और यह इक्यावन शक्तिपीठ में आता है। यह मंदिर उधमसिंह नगर के प्रमुख स्थानों में से एक है। मार्च माह के अवसर पर यहां चैती मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले का आयोजन बहुत बड़े स्तर पर किया जाता है। नवरात्रों के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु चैती देवी के दर्शनों के लिए यहां पर आते हैं। यह मंदिर काशीपुर-बाजपुर मार्ग पर स्थित है जो कि काशीपुर बस स्टैंड से 2.5 किलोमीटर की दूरी पर है।
5. नानक माता धाम -
यह बहुत ही बड़ा धाम है। नानक माता का निर्माण सरयू नदी पर किया गया है। नानक माता धाम केवल धाम नहीं है बल्कि यह जगह पिकनिक स्थल के रूप में जानी जाती है। यहां का शांत वातावरण और झीलों से बहता पानी इस स्थान की खूबसूरती को ओर अधिक बढ़ाता है। यहां बोटिंग का भी मजा लिया जा सकता है। यह धाम रुद्रपुर से 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
6. नानक माता -
सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी इस जगह पर घूमने के लिए आए थे। उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम नानक माता रखा गया। नानक माता सिखों के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक है। यह बहुत ही खूबसूरत गुरूद्वारा है। इसके सामने ही नानक माता धाम है। प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में भक्तगण इस जगह पर आते हैं। नानक माता में ही टूरिंस्ट रेस्ट हॉउस की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए गुरूद्वार में रहने की सुविधा भी उपलब्ध है। नानक माता रुद्रपुर - टनकपुर मार्ग पर स्थित है। यह स्थान रुद्रपुर से 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
Reference-