Abhinav Goswami
Sawai Raghunathpur(Aligarh--202138)नाम – अभिनव गोस्वामी पद – समाज सेवक व संस्थापक वैदिक ट्री फाउंडेशन, अलीगढ़ नवप्रवर्तक कोड – 71183360 परिचय – विश्व की सबसे बड़ी कम्पनियों में से एक ‘एप्पल’ में डेटा साइंटिस्ट के रूप में कार्य कर चुके अभिनव गोस्वामी वर्तमान के परिदृश्य में सेवा, समर्
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Biography & background — self/editorially authored, may be outdated
नाम – अभिनव गोस्वामी
पद – समाज सेवक व संस्थापक वैदिक ट्री फाउंडेशन, अलीगढ़
नवप्रवर्तक कोड – 71183360
परिचय –
विश्व की सबसे बड़ी कम्पनियों में से एक ‘एप्पल’ में डेटा साइंटिस्ट के रूप में कार्य कर चुके अभिनव गोस्वामी वर्तमान के परिदृश्य में सेवा, समर्पण और सादगी का जीवंत उदाहरण हैं. मूलरूप से अलीगढ़ के जरारा गांव के रहने वाले अभिनव जी दस वर्ष तक अमेरिका में रहे हैं. उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा गांव से व आगे की शिक्षा दिल्ली यूनिवर्सिटी से प्राप्त की है. उन्होंने 1997 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एमएससी किया है. शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेशन जगत में देश- विदेश की कई बड़ी कम्पनियों में काम किया. अन्त में अपने गांव के विकास व लोगों की सेवा करने के उद्देश्य से एप्पल कम्पनी की नौकरी छोड़कर वह वापस अपने गांव आ गये. इस समय वह गांवों के आर्थिक विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं.

मुख्य उद्देश्य –
अमेरिका में आलीशान जीवन व्यतीत करने के बजाय अपने गांव की सेवा को प्राथमिकता देने वाले अभिनव गोस्वामी अपनी सफलता का श्रेय अपनी शिक्षा, संस्कृति व संस्कारों को देते हैं, जो कि उन्होंने बचपन में अपने गांव में प्राप्त की थी. वह चाहते हैं कि इस प्रकार की शिक्षा, संस्कृति, संस्कार और सुविधाएं और बच्चों को भी उपलब्ध कराने के लिए गांवों में गुरूकुलों की स्थापना की जाये, जहां छात्रों को शिक्षा के साथ- साथ इस स्तर की ट्रेनिंग दी जाये, कि वह नौकरी के पीछे दौड़ना छोड़कर अपना व्यवसाय खड़ा करने के योग्य बन जायें. अभिनव जी का लक्ष्य है कि वह विश्वभर में ऐसे 108 गुरूकुलों की स्थापना करें.
रामायण पाठ से मिला मार्ग -
अभिनव गोस्वामी अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित अपने मकान में वह अक्सर रामायण पाठ कराते थे. मार्च 2017 तक उन्होंने अपने दोस्तों के माध्यम से 30 पाठ पूरे कर लिए और इसके बाद उनमें विरक्ति की भावना जाग्रत हुई व विदेश के यश, धन और वैभव को छोड़कर वह गांव वापस आ गए. 2007 में आईक्योर कम्पनी के आमंत्रण पर अमेरिका गए अभिनव जी ने 2013 से एप्पल कम्पनी में डेटा साइंटिस्ट के रूप में कार्य कर रहे थे. भारत वापस आने के लिए उन्होंने अपने परिवार को यह कहकर समझाया कि यदि दो साल में गुरूकुल का सपना साकार नहीं हुआ, तो वह वापस अमेरिका लौट जायेंगे. इस विचार के साथ वह अमेरिका का ग्रीन कार्ड और 1 करोड़ 95 लाख रुपये की नौकरी छोड़कर वापस आ गए.

भावी परियोजनाएं –
अपनी मिट्टी से काफी करीब से जुड़े होने के कारण अभिनव गोस्वामी गांवों के आर्थिक विकास के लिए कार्य करना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने वैदिक ट्री फाउंडेशन नामक एक संस्था की स्थापना भी की है, जिसके तीन मुख्य उद्देश्य है –
1. गौ आधारित कृषि को बढ़ावा
देना
2. गुरूकुलों की स्थापना व गौ
आधारित शिक्षा का विस्तार करना
3. गौ संरक्षण व गौ पालन को प्रोत्साहित करना.

अभिनव जी का मानना है कि गौ आधारित कृषि से न
सिर्फ किसानों को कम कीमत में फसल तैयार करने में सहायता मिलेगी, साथ ही लोगों को
शुद्ध दूध व अनाज भी मिल सकेगा. इस दिशा में कार्य करने के लिए अभिनव जी ने अपने
गांव में 200 गायों वाली एक गोशाला की स्थापना की है, जिनके द्वारा शुद्ध दूध,
अनाज व चारा प्राप्त करने के लिए एक इकोसिस्टम भी तैयार किया जा चुका है और इस पर
कार्य भी हो रहा है.
बाधाएं व चुनौतियां –
अभिनव गोस्वामी का मानना है कि समाज में किसी भी प्रकार का परिवर्तन लाने में सबसे बड़ी बाधा जो आती है, वह है स्वयं में परिवर्तन लाना. अभिनव जी का कहना है कि उनके लिए एप्पल की नौकरी छोड़ना काफी कठिन फैसला था. उसके बाद अपने परिवार को गांव वापस लाने के लिए मनाने में भी उन्हें काफी मुश्किल हुई. गांव में काम शुरू करने के बाद उन्हें कई बार कुछ किसानों के विरोध का सामना भी करना पड़ा. इसके अलावा अपनी बिजली खुद बनाने के बावजूद उन पर बिजली विभाग ने बिजली चोरी का मुकदमा दायर किया. हालांकि अपने प्रोजेक्ट को आगे ले बढ़ाने में उन्हें जिला प्रशासन का उचित सहयोग मिल रहा है.

नीतिगत परिवर्तन –
गौ आधारित प्रोजेक्ट्स के संदर्भ में नीतिगत परिवर्तन पर अभिनव गोस्वामी का मानना है कि सरकार को गौ वंश बढ़ाने के लिए लोन देने की व्यवस्था करनी चाहिए. इसके साथ ही ऐसे प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए बैंको को अपनी नीतियों में परिवर्तन करना चाहिए व गो- पालन करने वालों को यथासमय धन उपलब्ध कराना चाहिए.

सामाजिक परिवर्तन –
अभिनव गोस्वामी के अनुसार, कुछ लोग समझ ही नहीं पाते कि वह अपने लिए किस प्रकार का परिवर्तन चाहते हैं, जिसकी वजह से वह समाज में किसी भी प्रकार का परिवर्तन देखकर नकारात्मकता फैलाना शुरू कर देते हैं. ऐसे लोग सकारात्मकता के साथ परिवर्तन को स्वीकार करें और उससे कुछ सीखते हुए स्वयं को परिवर्तन के प्रति समर्पित करें.

अभिनव जी का कहना है कि गौ वंश, गुरूकुल और
जैविक कृषि पर आधारित उनका यह प्रोजेक्ट महज एक साधारण प्रोजेक्ट न होकर इंडिया को
भारत बनाने की एक यात्रा है तथा वह चाहते हैं कि सकारात्मक सोच के साथ ज्यादा से
ज्यादा देशवासी उनकी इस यात्रा से जुडें.
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