Ajit Verma
Aliganj(Lucknow-Lucknow-226024)नवप्रवर्तक : अजीत वर्मा पदभार : समाज सेवी व संयोजक बंदे भारत, लखनऊ नवप्रवर्तक कोड़ : 71183568 परिचय खेलों में विशेष रूचि रखने वाले अजीत वर्मा जी अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं. उन्होंने एशियन क्रॉस कन्ट्री में सिल्वर मेडल भी प्राप्त किया है. बचपन स
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Biography & background — self/editorially authored, may be outdated
नवप्रवर्तक : अजीत वर्मा
पदभार : समाज सेवी व संयोजक बंदे भारत, लखनऊ
नवप्रवर्तक कोड़ : 71183568
परिचय
खेलों में विशेष रूचि रखने वाले अजीत वर्मा जी अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं. उन्होंने एशियन क्रॉस कन्ट्री में सिल्वर मेडल भी प्राप्त किया है. बचपन से ही खेलों के प्रति रुझान होने के कारण उन्होंने खेलों में विभिन्न पुरुस्कार प्राप्त कर क्षेत्र का नाम भी रोशन किया है.

विगत कई वर्षों से सामाजिक परिदृश्य को देखते हुए उन्होंने समाज के सभी शोषित वर्गों की आवाज बन कर कार्य करना आरंभ किया है. समाज सेवा के कार्यों को पूर्ण करने के लिए हर संभव प्रयास करने वाले अजीत जी को लोगों के मध्य रहकर उनकी समस्याओं को समझना व उनकी मदद करना बेहद अच्छा लगता है.

संगठन : मिशन व विजन
डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने जिस भारत का स्वप्न देखा था, आज वह उसी स्वप्न को पूर्ण करने के लिए संघर्ष कर रहें हैं. वह अपने संगठन के द्वारा भारत में सभी को शिक्षित, सक्षम व रोजगार प्रदान कराने के लिए विभिन्न प्रयास कर रहें हैं. उनके संगठन का मुख्य ध्येय ही असमानता को समाप्त कर देश को प्रगतिशील बनाना है.
विगत 10 वर्षों से अपने संगठन के माध्यम से खिलाडियों की विभिन्न आयामों द्वारा सहायता कर अजीत जी युवा खिलाडियों को अपना हुनर दिखाने का अवसर प्रदान कर रहें हैं. अजीत जी स्पर्श स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फाउंडेशन के जरिए सभी खिलाडियों की मूलभूत आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत रहते हैं.

इसके अतिरिक्त समाज में व्याप्त असामनता जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से उन्होंने “बंदे भारत” संगठन की स्थापना भी की है, जिसका प्राथमिक ध्येय ही “कमजोर बनाम सक्षम की लड़ाई” है. अजित जी के अनुसार समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है तथा वह सभी मौलिक सुविधाओं से भी वंचित हैं. वह अपने इस संगठन के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपनी सेवाएं पहुँचाने के लिए प्रयासरत हैं तथा वह इसे अपना सामाजिक उत्तरदायित्व मानते हुए कार्य कर रहें हैं.

देश के प्रमुख मुद्दें :
अजीत जी के अनुसार आज देश के उन सैनिकों के लिए सोचना बेहद अहम मुद्दा है, जो हमारी सुरक्षा के लिए दिन-रात तैनात रहते हैं. उनके
अनुसार आज सीआरपीएफ के जवानों को पेंशन भी प्राप्त नही तथा उनके संगठन के साथ भी
काफी संख्या में जवान जुड़े हुए हैं. जिनके हित के लिए वह आवाज उठा रहें हैं. वह
चाहते हैं कि देश के सैनिकों के साथ-साथ अन्य पेराफोर्स व राज्यों की पुलिस को भी
सैनिक का दर्जा प्राप्त हो. उन्हें भी सभी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाए.
इसके अतिरिक्त वह खेलों से जुड़ीं विभिन्न समस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाए.
देश के प्रत्येक खिलाडी को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जाए. जिसके लिए सरकार को
अपनी नीति-निर्माण की प्रक्रिया को और भी अधिक मजबूत बनाना होगा. खेल संघ में
विद्यमान राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और गैर स्पोर्ट्समेन को हटा कर
प्रतिभावान खिलाडियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना होगा, ताकि खेल की दृष्टि
से हमारा देश पूर्ण रूप से विकसित हो पाए.
नीति परिवर्तन पर विचारधारा :
नीति परिवर्तन पर अजीत जी का मानना है कि आज स्वतंत्र रूप से अपने अधिकारों का
प्रयोग करना भारतीय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है. वर्तमान समय में भारत की जो
स्थिति हो गयी है, उसे एक सभ्य
समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा. अजीत जी एक ऐसे भारत की परिकल्पना करते हैं, जहां पर सभी को अपने विचार स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत रखने
की आजादी हो, सभी अपनी बात निडर होकर कह
सके और प्रत्येक व्यक्ति को स्वेच्छा से कार्य करने की आजादी प्राप्त हो. देश में
विकास के स्तर पर भी समानता आनी बेहद जरुरी है.
परन्तु आज सरकारी तंत्र के मध्यम से बेहद गुंडागर्दी हो रही है, जिसके कारण समाज में बहुत सी समस्याएं उत्पन्न होती जा रही
हैं. सरकारी विभाग का कोई व्यक्ति भी अपने हक़ के लिए आवाज उठाने का प्रयास करता है, तो उसकी आवाज दबा दी जाती है. इतना ही नही आज आमजन व छात्र
भी अपने हित के लिए आवाज नहीं उठा पाते. इस दृष्टिकोण से आज सर्वप्रथम इस समस्या
को समाप्त करने के लिए संघर्ष करना बेहद आवश्यक हो गया है.
भविष्यगत योजनाएं :
अजीत जी के अनुसार वह स्वयं भी एक आम आदमी हैं तथा वह भविष्य में समाज की बेहतरी के लिए विभिन्न कार्य सम्पन्न करना चाहते हैं. उनका ध्येय है कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति को सक्षम बनाने के लिए प्रयास करने है. जिस प्रकार हम अपने बच्चों की शिक्षा व उनके विकास के लिए प्रयास करते हैं, ठीक उसी प्रकार उन बच्चों को भी सामान रूप से शिक्षा प्रदान होनी चाहिए, जिनके अभिभावक उन्हें शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक रूप से सुदृढ़ न हो. इसके अतिरिक्त सभी को समान रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त होने चाहिए. इसी प्रकार की मूलभूत समस्याओं पर वह कार्य करना बेहद जरुरी समझते हैं.
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