नाम - प्रोफेसर मनोज कुमार
नवप्रवर्तक कोड – 71183485
पद – डीन, स्कूल ऑफ लॉ, महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा और गांधीवादी चिंतक
जीवन परिचय
प्रोफेसर मनोज कुमार बेहद ही सरल और सहृदय व्यक्तित्व वाले इंसान हैं। मनोज जी गांधीवादी विचारक, सामाजिक कार्यकर्ता और साथ ही शिक्षक भी हैं। आपका जन्म बिहार में ही हुआ और वहीं से आपकी शुरूआती शिक्षा भी हुई। आपने आगे की पढाई तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से पूरी की। बिहार में रहकर आपने कई वर्षों तक कार्य किया है और वहीं से अपने सामाजिक जिम्मेदारियों को भी निभाया है. वर्तमान में आप महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर अपने दायित्व को निभा रहे हैं।
सामाजिक क्षेत्र में योगदान
आपने वर्ष 1974 के दौरान बिहार के बांका जिले से छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया। उसी दौरान आप दो बार जेल भी गए। 1989 के भागलपुर में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद मनोज जी ने शांति सद्भावना स्थापना में अपना योगदान दिया। उसके बाद वर्ष 1990 से वर्ष 2005 तक आप गांधी शांति प्रतिष्ठान, भागलपुर में बतौर सचिव पद पर रहकर अपने सामाजिक योगदान को और आगे बढ़ाया। मनोज जी ने विभिन्न संस्थान जैसे समन्वय समिति, केंद्रीय शांति सद्भावना समिति आदि में विभिन्न पदों पर रहते हुए कार्य किया। वर्ष 2000 के दौरान जब भयंकर बाढ़ आई तो उस दौरान भी मनोज जी ने कपाट से और जर्मनी की एक संस्था के सहयोग से 1500 लोगों के रिलीफ, रिहैबिलिटेशन और लो कॉस्ट हाउसिंग का काम करवाया।
नदियों पर किया काम
उन्होंने इसके साथ रिवर ट्रेडिशनल इरिगेशन सिस्टम का भी अध्ययन किया और फिर स्वराज नामक संस्थान के साथ मिलकर कोसी कंसोडियम, गंडक और गंगा के लिए बिहार में काम किया। इसके अलावा उन्होंने गांधी पीस सेंटर के साथ मिलकर 1991 से 1994 तक स्टेट कोऑर्डिनेटर के तौर पर कार्य किया है।
गाँधी से जुड़ाव
1974 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान इंटरमीडिएट की पढ़ाई में भले ही रुकावट आई हो मगर 1980 के दौरान उन्होंने तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय जहां से पूरे हिंदुस्तान में सबसे पहली बार गांधियन थॉट्स यानी गांधी विचार की पढ़ाई शुरू हुई थी उसमें आपने सबसे पहले बैच 1980-1982 सत्र के दौरान टॉप किया। वर्ष 1989 में उन्होंने अपनी पीएचडी गांधी जी से जुड़े विषय शांति सेना जो कि गांधी जी के अनुयायियों ने बनाया था उस पर लेकर की।
मनोज कुमार बतौर शिक्षक
आगे चलकर वह 10 वर्षों तक गांधियन थॉट डिपार्टमेंट, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में बतौर शिक्षक के तौर पर अपना कार्य करते रहे इसी में ढाई वर्ष उन्हें प्रोफेसर इंचार्ज रहने का भी मौका मिला। मनोज जी ने इसके बाद महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में काम करना शुरू किया और वर्तमान में भी वह इसी विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। सर्वप्रथम व संस्कृति विद्यापीठ के डीन रहे, उसके बाद वह स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के डीन बने और वर्तमान में व स्कूल ऑफ लॉ के डीन के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कर रहे हैं।